आख्या भर आई री आख्या भर आई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आख्या भर आई री आख्या भर आई,

फागण की बारस बीती हो सी विदाई,

आख्या भर आई री आख्या भर आई,

फागन के मेले माहि घनो सुख पायो जी,

जावती वक़्त माहरो हिवड़ो भर आयो जी,

कइयां में सह फा वेला दासु जुदाई,

आख्या भर आई री आख्या भर आई,

देहि महारा जीवन धन हो था से क्या की शानी जी,

कालजे री कोर संवारा प्रीती है पुरानी जी,

एही सांचा बांकी दुनिया झूठी रिश्ते दारी,

आख्या भर आई री आख्या भर आई,

राजी राजी जा रे बेटा संवारा यु बोले.

हर्श तेरे मन की जाने क्या तू मुह खोले रे,

बेगो बेगो आठो रीजे दर्श सुनाई,

आख्या भर आई री आख्या भर आई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।