हे मइयां दुःख रूपी सागर लगा दे तू पार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे मइयां दुःख रूपी सागर लगा दे तू पार,

सभी पापो का हमारे मैया कर दे संगार,

तूने दीन दुखियो पे सदा किये उपकार,

अपने बच्चो की है तू ही जीवन आधार,

ओ मईया.....

ध्यान लगा हो चरण में तेरे ऐसा ही सुख हो नसीब में मेरे,

सेवा में तेरी गुजर जाये जीवन जाप चले तेरा सांझ सवेरे,

ओ मइया करदे किरपा हो जाये उधार,

सभी पापो का हमारे मैया कर दे संगार,

कलयुग में सुख फल प्रधान करो तुम,

सभी के शोक रोक हरो तुम,

काल जाहि तुम अभे दान देती,

भक्तो के खाली भण्डार भरो तुम,

करू महिमा ऐसी हम पर मइया भव अटके लगे तारे मइया,

तेरा जाप हो माँ पाप नाश हो माँ मुक्ति श्राप हो माँ,

कर तू ऐसी किरपा,

ओ माइया लेले खबरियां बेडा हो जाये पार,

सभी पापो का हमारे मैया कर दे संगार,

तेरा नाम ले ने से पीड़ा मुक्त हो,

तेरे दर्शन से मइया बना युक्त हो,

मिले भक्ति तेरी हम तेरे भक्त हो,

हो मइयां लेले शरण में खड़े कब से तेरे द्वार,

सभी पापो का हमारे मैया कर दे संगार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।