कैलाशी गा मरघट वाशी गा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कैलाशी गा मरघट वाशी ॥

बने हावय तिरिया त्रिपुरारी गा

गउरा बनेहे राधा रानी।

मोहना कन्हया माँ भवानी।

सुनले कहानी गा ॥ वेद के बानी गा॥

एक समय दाई पारबती संग,भोला अवघड दानी गा,

किंजरत हे कैलाश के बन म,जुग जुग दुनो परानी गा,

गउरी के सुघ्घर रूप ल देखे,बोले संभु सुजानि गा,

तिरिया बने के आस हे मोला,पिरथीलोक म शिवानी गा,

महू बनजातेव अइसे नारी।

जइसे तै हावस मोर सुवारी।

गउरा के साधेहे गा ॥ अचरज लागे गा॥

शिव के गोढ़ ल सुनके उमाहर,हरसाये बड़ भारी गा,

तोर हींछा के मान ह होही,अरथाये महतारी गा,

तिरथाजुग म तै राधा होबे,मैहर मदन मुरारी गा

आठो मुरति घलो अवतरही,बनके गोपी नियारी गा

अइसे बधाये हे करारी।

बिधिना के माया हे अपारी।

अगम चरित्तर गा ॥ कथा बिचितर गा॥

कमल पुल म राधा बनके,जनमें हे शिव संकर गा,

महामाया सगरो सक्ति हर,किसना गुवाल उजागर गा,

किसम किसम के लीला करेहे,मन भावन सुख सागर गा,

अइसे शिव के मनसा पुराये,मिरतुलोक के भितर गा,

राधा किसना माया के चिन्हारी।

नाव के महिमा हे अपारी।

गौतम गाले गा ॥ पाप धोवाले गा॥

गायक =दिवेश साहू

संगीत= सेवक राम एवं अमर सेन्द्रे

रचनाकार = शेषनारायण गौतम गुरु जी

जय माँ चण्डी मंडली गांधी नगर लाखेनगर रायपुर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।