आखिरी सांस है तुझको पुकारू माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आखिरी सांस है तुझको पुकारू माँ तुझको पुकारू,

दर्शन देदे हे जगजननी निश दिन तेरा रस्ता निहारु,

आखिरी सांस है तुझको पुकारू माँ तुझको पुकारू,

होगी नहीं क्या आशा ये पूरी रह जायेगी क्या ईशा अधूरी,

दर्द में कितना दिल में उतारू,

निश दिन तेरा रास्ता निहारु,

आखिरी सांस है तुझको पुकारू माँ तुझको पुकारू,

तुझसे भरोसा उठ नहीं जाये,

सांसो का दामन छूट नहीं जाये,

शक्ति दो मुझको माँ मैं न हारू निश दिन तेरा रस्ता निहारु ,

आखिरी सांस है तुझको पुकारू माँ तुझको पुकारू,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।