तेरे दर पे आने के मैया दो बहाने है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर पे आने के मैया दो बहाने है,

कुछ शिकवे करने है कुछ दर्द सुनाने है,

गिरा हुआ हु दुखो से तुम ने सार न जानी है,

घाव गहरे पीड़ा हारी आँख से झलका पानी है,

कितनी आहे कितने आंसू तुम्हे गिनाने है,

कुछ शिकवे करने है कुछ दर्द सुनाने है,

सार है तुम को मैया तेरा दर ही मेरा ठिकाना है,

हाल दिल का तेरे सिवा किसको और सुनाना है,

सुख भी सारे दुःख भी सारे तुम्हे बताने है,

कुछ शिकवे करने है कुछ दर्द सुनाने है,

करने है जो सिकवे तुझसे सागर लिख के लाया है,

कहना कुछ भी रह न जाये मन में सोच के आया है,

क्या है पाया काया है खोया हिसाब दिखाने है,

कुछ शिकवे करने है कुछ दर्द सुनाने है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।