तेरी महिमा है अप्रमपार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओ रे मइयां मइयां मइयां ओ रे मइयां मइयां

तेरी महिमा है अप्रमपार ओ माता जगदम्बे,

ओ रे मइयां मइयां मइयां ओ रे मइयां मइयां

आई हु माँ तेरे दर पे लेके लाल चुनरियाँ,

देदे मइया देदे मुझको प्यारा साथ सांवरियां,

करदे करदे माँ पीले हाथ ओ माता जगदम्बे,

तेरी महिमा है अप्रमपार ओ माता जगदम्बे

जो आये माँ तेरे दर पे मन चाहा वर पाये,

मुझको भी ऐसा वर दे जो सब को बड़ा सुहाये,

कर लुंगी मैं सोलह शृंगार ओ माता जगदम्बे,

तेरी महिमा है अप्रमपार ओ माता जगदम्बे

मइया मोरी आज मेरे तुझसे ये नैन मिलते,

झट मेरी मंगनी झट मेरी शादी मइयां मेरी करवा दे,

दर पे आउंगी जोड़े के साथ ओ माता जगदम्बे,

तेरी महिमा है अप्रमपार ओ माता जगदम्बे

कयतानी महा महामायनी तेरी महिमा अपार है,

दीप्ती तो करे वंदना तेरी जय जय कार है,

पूरी कर दे माँ मेरी मुराद ओ माता जगदम्बे,

तेरी महिमा है अप्रमपार ओ माता जगदम्बे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।