मैं दर आनी आ माँ मैं तरले पानी आ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

एहना अखियां नु दर्श दिखा,

मैं दर आनी आ माँ मैं तरले पानी आ

अखियां ने रज रज दर तेरे रोना है,

रो रो के वेहड़ा अज हंजुआ न धोना है,

चुप नहियो होना है माये आके मैनु चुप तू करा,

मैं दर आनी आ माँ मैं तरले पानी आ

तेरी मेहरबानी दियां सुनियाँ कहानियां,

किवे मैं सुनवा मेथो दसियां नहीं जानियाँ,

कर मेहरबानी माये बछड़ी ते कर्म कमा,

मैं दर आनी आ माँ मैं तरले पानी आ

बचडी निमाणी दा सुन कदी हाल माँ,

तेरे दर आउंदे आ नु हो गये कई साल माँ,

रोंदा तेरा लाल माँ दीवाने दीं भी फड़ ले तू बांह माँ,

मैं दर आनी आ माँ मैं तरले पानी आ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।