तेरी महिमा तो अप्रम पार है माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरा मन माँ कहे मेरा तन माँ कहे ,

कण कण में तू साकार है माँ,

तेरी महिमा तो अप्रम पार है माँ,

मेरा मन माँ कहे मेरा तन माँ कहे

तू चंदा में किरणों में माँ,

तू पर्वत में झरनो में माँ,

तेरा कुदरत में अधिकार है माँ,

कण कण में तू साकार है,

तेरी महिमा तो अप्रम पार है माँ,

तू मेगो की घन घन में माँ,

तू बरखा की रुत झुँ में माँ,

तू बुंदू की झंकार है माँ,

कण कण में तू साकार है,

तेरी महिमा तो अप्रम पार है माँ,

तू कोयल की कु कु में,

तू पपीहे की पीहू में माँ,

तू चिडियो की चहकार है माँ,

कण कण में तू साकार है,

तेरी महिमा तो अप्रम पार है माँ,

तू सुबह है तू शाम है माँ,

हर जर रा तेरे गुलाम है माँ,

शृष्टि का आधार है माँ,

कण कण में तू साकार है,

तेरी महिमा तो अप्रम पार है माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।