ॐ जय जगदानन्दी मैया

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी।

ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा शिव हर‍ि शंकर, रुद्रौ पालन्ती।

॥ ॐ जय जगदानन्दी...॥

देवी नारद सारद तुम वरदायक, अभिनव पदण्डी।

सुर नर मुनि जन सेवत, सुर नर मुनि...

शारद पदवाचन्ती।

॥ ॐ जय जगदानन्दी...॥

देवी धूमक वाहन राजत, वीणा वाद्यन्ती।

झुमकत-झुमकत-झुमकत,

झननन झमकत रमती राजन्ती।

॥ ॐ जय जगदानन्दी...॥

देवी बाजत ताल मृदंगा, सुर मण्डल रमती।

तोड़ीतान-तोड़ीतान-तोड़ीतान,

तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती।

॥ ॐ जय जगदानन्दी...॥

देवी सकल भुवन पर आप विराजत, निशदिन आनन्दी।

गावत गंगा शंकर, सेवत रेवा

शंकर तुम भट मेटन्ती।

॥ ॐ जय जगदानन्दी...॥

मैयाजी को कंचन थार विराजत, अगर कपूर बाती।

अमर कंठ में विराजत, घाटन घाट बिराजत, कोटि रतन ज्योति।

॥ ॐ जय जगदानन्दी...॥

मैयाजी की आरती, निशदिन पढ़ गा‍वरि,

हो रेवा जुग-जुग नरगावे, भजत शिवानन्द स्वामी

जपत हर‍ि नंद स्वामी मनवांछित पावे।

ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी।

ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा शिव हर‍ि शंकर, रुद्रौ पालन्ती।

Posted By- Dinesh यादव

Mo. 7771089263

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।