मेरी मैया सुन ती पुकार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर का यही है दस्तूर,

मुँह मांगा है मिलता जरूर,

नाम तेरा जपले तो सब दुःख दूर,

कोई काहे ठोकर खाये तेरे दर आये,

के चरणों में शीश झुकाये मेरी मइयाँ सुनती पुकार,

कोई जब राह न पाए तेरे दर आये.

के चरणो में शीश झुकाये मेरी मइयाँ सुनती पुकार,

मैया जी तेरे कई रूप हजार जानता है ये सारा संसार,

पल में है करती तू दुष्टो का संगार,

कोई जब दर्शन पाये तेरे दर आये के चरणों में शीश झुकाये,

मेरी मैया सुन ती पुकार

मोह माया का सारा ही जहां,

दुनिया में हर कोई परेशान,

शरण तेरी जो रहता वही है इंसान,

सहगल ये भजन गाये तेरे दर आये,

के चरणों में शीश झुकाये

मेरी मैया सुन ती पुकार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।