मेहन्दीपुर लगा के बैठे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

बजरंगी की पूजा होती मंगल और शनिवार

मेहन्दीपुर लगा के बैठे,बाला जी अपना दरबार

हाथ में मुगधर लाल लंगोटा,रूप विशाल

ये बलकारी मारुति नंदन,बेमिसाल

चैत्र सुदी पूनम को जन्मे महिमा है अपरम्पार

मेहन्दीपुर लगा के बैठे.......

प्रभु राम का जिसने,भी गुण गाया है

बजरंगी ने उसको,गले लगाया है

ले के शरण में अपनी उसको कर देते उद्धार

मेहन्दीपुर लगा के बैठे.......

कैसी भी हो विपदा,दूर भागते है

इसलिए संकटमोचन,कहलाते है

नर तो क्या नारायण भी माने इसका उपकार

मेहन्दीपुर लगा के बैठे......

मंगलकारी मंगल करते है प्रभु

शनिवार को भक्त चढ़ाते इन्हें सिंदूर

"रूबी रिधम" दर शीश झुकाते करते जय जयकार

मेहन्दीपुर लगा के बैठे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।