मैं मस्ती दे विच नचा नचावा नंदलाल नु

अलका गोएल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं मस्ती दे विच नचा नचावा नंदलाल नु

नचावा नंदलाल नु नचावा मदन गोपाल नु

मोर मुकुट तो सदके जावा

अपने हिरदय विच वसावा

मैं नटवर दीन दयाल नु नचावा नंदलाल नु

मैं मस्ती........

मुरली तू केह्डा पुन किता

हर दम होटा दा रस पिता

पिलावा लाल गोपाल नु नचावा नंदलाल नु

मैं मस्ती.......

अपने सुते भाग जगावा

चूम चूम मथे दे नाल लगावा

तेरे गल बैजन्ती माल नु नचावा नंदलाल नु

मैं मस्ती........

चरना दी चांजर एह कहन्दी

हरि नाम दी ला लई मेहंदी

होजा तू लालो लाल तू नचावा नंदलाल नु

मैं मस्ती........

पिला है पेतम्बर तेरा

लुटके ले गया दिल ओह मेरा

कदे ना पुछेया हाल नु नचावा नंदलाल नु

मैं मस्ती.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।