जिंदगी पे कर्म तुझसे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी आँखों में तू मुश्कुराये,

मेरी धड़कन पे है तेरे साये,

पुजती है नजर तुझको अठो पहर,

कौन तेरे सिवा याद आये,

जिंदगी पे कर्म तुझसे हर ख़ुशी हर गम तुजसे,

वादे और कसम तुझसे हर ख़ुशी हर गम तुझसे,

जिंदगी पे कर्म तुझसे हर ख़ुशी हर दम तुजसे,

आके देखे कोई याहा अपने होते है कैसे,

जशन खुशियाँ मनाती है घर जन्नत हो जैसे,

इक दूजे के बंधन में बंध गये है जैसे,

कोई शिकवा न हो दोर जैसा भी हो,

फंसला बीच में आ ना पाये,

जिंदगी पे कर्म तुझसे हर ख़ुशी हर गम तुजसे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।