मीरा दीवानी हो गयी रे मीरा मस्तानी हो गयी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मीरा दीवानी हो गयी रे, मीरा दीवानी हो गयी ।

मीरा मस्तानी हो गयी रे, मीरा मस्तानी हो गयी ॥

शयम रंग में रंगी चुनरिया, हो हो हो हो...

मीरा दीवानी हो गयी रे, मीरा मस्तानी हो गयी...

राणा की राजधानी छोड़ी लोक लाज सब छोड़ी,

रंग के श्याम रंग में चुनर मीरा जी ने ओडी ।

लोक लाज की नहीं खबरिया, हो ओ ओ..

मीरा दीवानी हो गयी रे, मीरा मस्तानी हो गयी...

इस दुनिया से प्रीत तोड़के श्यामल रंग चढ़ाया,

साथ सभी का छोड़ दिया और गिरिधर गिरिधर गाया ।

वो तो ऐसी भाई बावरिया, हो ओ ओ,

मीरा दीवानी हो गयी रे, मीरा मस्तानी हो गयी...

पैरों में वो घुँघरू बाँध के नाचे झूमे गाए,

भई विहरनी श्याम विरहा और ना कोई है भाए ।

वृन्दावन की गयी डगरिया, हो ओ ओ,

मीरा दीवानी हो गयी रे, मीरा मस्तानी हो गयी...

लगन लगी तेरे दरश की और ना कोई भाए,

गली गली तोहे ढूंढती ढोले कही ना फिर वो पाए ।

तेरे दर पे बीती उमरिया, हो ओ ओ,

मीरा दीवानी हो गयी रे, मीरा मस्तानी हो गयी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।