बता मेरे यार सुदामा रे (भाई घणे दिना में आया)

साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण भजन भजन साध्वी पूर्णिमा
॥ दोहा ॥

देखि सुदामा की दीन दसा, करुना करि के करुनानिधि रोये।
पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सों पग धोये॥

॥ चौपाई ॥

बता मेरे यार सुदामा रे, भाई घणे दिना में आया।
बता मेरे यार सुदामा रे, भाई घणे दिना में आया॥

बालक थे जब इकठे पढ़ते, कृष्ण गुरु के धाम।
कदे न भूलूं बचपन का वो सुंदर सा वो काम॥
घणे दिना में आया रे सुदामा, घणे दिना में आया।
बता मेरे यार सुदामा रे, भाई घणे दिना में आया॥

तू बैठ पलंग पे प्यारे, तेरे पाँव दबाऊँगा।
जो भी तू चाहेगा, वही भोग लगाऊँगा॥
भाभी ने जो भेजा चावल, पोटली क्यों छुपावे।
तीन लोक की संपत्ति, दो मुट्ठी में लुटावे॥

बता मेरे यार सुदामा रे, भाई घणे दिना में आया॥

॥ दोहा ॥

सखा सखा मिले ऐसे जैसे बिछुड़े हंस की डार।
कृष्ण सुदामा प्रेम का, महिमा अपरंपार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

साध्वी पूर्णिमा जी द्वारा भावविभोर कर देने वाले इस पारंपरिक राग में भगवान श्री कृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के अलौकिक, निश्छल प्रेम का हृदयस्पर्शी गान किया गया है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।