॥ दोहा ॥
बरसाने की लाडली, दयामयी सरकार।
इंद्रेश शीश नवावत, कर दो बेड़ा पार॥
॥ चौपाई ॥
बरसाने वाली राधे, तू कृपा कर दे।
मेरी खाली झोली को, भक्ति से भर दे॥
बरसाने वाली राधे॥
तेरे दर पे जो भी आया, खाली नहीं लौटा।
तूने तो सँवारा है, जो भी था खोटा॥
मुझ दीन दुखी पे भी, नज़र दया की कर दे।
बरसाने वाली राधे, तू कृपा कर दे॥
बरसाने के महलों की, बड़ी शान निराली।
जहाँ बैठ के सुनती हो, तुम सबकी पुकार॥
मेरे भी सिर पे अपना, वरद हस्त धर दे।
बरसाने वाली राधे, तू कृपा कर दे॥
इंद्रेश कहे लाडली, तू ही सहारा है।
तेरे बिना कोई नहीं, जग में हमारा है॥
राधा राधा कह के, जीवन सफल कर दे।
बरसाने वाली राधे, तू कृपा कर दे॥
॥ दोहा ॥
वृषभानु कुंवारी लाडली, करुणामयी निधान।
इंद्रेश शरण में आ पड़ा, कीजो कृपा प्रदान॥