बरसाने की गलियों में इक बार बुला लो ना

चित्र विचित्र जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन चित्र विचित्र जी
॥ दोहा ॥

बरसाने की धूलि में, जीवन करूँ निसार।
चित्र विचित्र पुकारसी, लाडली कृपा अपार॥

॥ चौपाई ॥

बरसाने की गलियों में इक बार बुला लो ना।
अपनी ही नगरिया में दासी बना लो ना॥
बरसाने की गलियों में॥

महलों की चाह नहीं मुझको, ना धन दौलत की प्यास है।
तेरी चौखट पे शीश झुके, बस यही एक आस है॥
अपने चरण कमलों की, सेवा में लगा लो ना।
बरसाने की गलियों में इक बार बुला लो ना॥

सुना है बरसाने में जो जाए, खाली हाथ न आए वो।
श्री जी की कृपा पाकर, भवसागर तर जाए वो॥
मुझ अनाथ बालक को, गले से लगा लो ना।
बरसाने की गलियों में इक बार बुला लो ना॥

चित्र विचित्र की लाडली, सुन लो करुण पुकार।
राधा नाम गाते गाते, हो जाए बेड़ा पार॥
अपने ही रंग में अब, मुझको रंग डालो ना।
बरसाने की गलियों में इक बार बुला लो ना॥

॥ दोहा ॥

बरसाने की छांव में, बीते सकल विहान।
चित्र विचित्र शरण में, जय जय श्री भगवान॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

बरसाना धाम की पावन गलियों में वास पाने और श्री राधा रानी के श्रीचरणों की दासी बनने की आर्त पुकार।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।