॥ दोहा ॥
कजरारे नैनन विषे, अमृत रस की धार।
चित्र विचित्र बलिहारी जावे, जय बांके सरकार॥
॥ चौपाई ॥
बांके बिहारी तेरे नैना कजरारे।
नैना कजरारे, नैना मतवारे॥
बांके बिहारी तेरे नैना कजरारे॥
तिरछी नज़रिया जब से मारी।
सुधबुध भूली दुनिया सारी॥
घायल कर गए रूप तिहारे।
बांके बिहारी तेरे नैना कजरारे॥
झांकी देखन जो भी आवे।
बिहारी जी का ही हो जावे॥
दर्शन देके भाग संवारे।
बांके बिहारी तेरे नैना कजरारे॥
चित्र विचित्र कहे सांवरिया प्यारे।
हम तो दास हैं तुम्हारे॥
चरण कमल में दास तुम्हारे।
बांके बिहारी तेरे नैना कजरारे॥
॥ दोहा ॥
बांकी झांकी बांके नैन, बांकी चाल रसाल।
चित्र विचित्र वंदन करे, जय बांकेबिहारी लाल॥