॥ दोहा ॥
वृंदावन सो वन नहीं, नन्दगाँव सो गाँव।
पूजा सखी के हिय बसे, कृष्ण नाम सो नाँव॥
॥ चौपाई ॥
बांके बिहारी मुझको देना सहारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥
बांके बिहारी मुझको देना सहारा॥
तेरे सिवा मेरा कोई नहीं है।
किस्मत मेरी प्रभु तूने रची है॥
मेरी नैया को प्रभु देना किनारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥
दुनिया के झूठे रिश्तों से हारी।
तेरे ही द्वारे पे आके पुकारी॥
तू ही तो है मेरे प्राणों से प्यारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥
पूजा सखी गाए महिमा तुम्हारी।
कृपा दृष्टि रखना हे कुंजबिहारी॥
चरणों में तेरे है जीवन गुजारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥
॥ दोहा ॥
करुणा सिंधु दीनबंधु, बांकेबिहारी लाल।
पूजा सखी शरण पड़ी, राखहु सदा दयाल॥