॥ दोहा ॥
बांके बिहारी दयानिधि, राखहु लाज हमार।
देवी चित्रलेखा वंदन करे, तू ही खेवनहार॥
॥ चौपाई ॥
बांके बिहारी मुझको देना सहारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥
बांके बिहारी मुझको देना सहारा॥
तेरे सिवा प्रभु कोई ना मेरा।
अंधियारे जीवन में तू ही सवेरा॥
मुझको दिखाना प्रभु पावन किनारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥
संसार के ताने सह नहीं पाऊं।
तेरे दर के सिवा मैं कहाँ जाऊं॥
तू ही तो है मेरे नैनों का तारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥
देवी चित्रलेखा कहे करुणा के सागर।
भर दे प्रभु मेरी भक्ति की गागर॥
चरणों में तेरे है जीवन गुजारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥
॥ दोहा ॥
दीन अनाथ की बिनती, सुन लीजो करतार।
देवी चित्रलेखा शीश धरे, जय जय कुंजबिहार॥