बांके बिहारी मुझको देना सहारा कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा

देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण भजन भजन देवी चित्रलेखा
॥ दोहा ॥

बांके बिहारी दयानिधि, राखहु लाज हमार।
देवी चित्रलेखा वंदन करे, तू ही खेवनहार॥

॥ चौपाई ॥

बांके बिहारी मुझको देना सहारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥
बांके बिहारी मुझको देना सहारा॥

तेरे सिवा प्रभु कोई ना मेरा।
अंधियारे जीवन में तू ही सवेरा॥
मुझको दिखाना प्रभु पावन किनारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥

संसार के ताने सह नहीं पाऊं।
तेरे दर के सिवा मैं कहाँ जाऊं॥
तू ही तो है मेरे नैनों का तारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥

देवी चित्रलेखा कहे करुणा के सागर।
भर दे प्रभु मेरी भक्ति की गागर॥
चरणों में तेरे है जीवन गुजारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥

॥ दोहा ॥

दीन अनाथ की बिनती, सुन लीजो करतार।
देवी चित्रलेखा शीश धरे, जय जय कुंजबिहार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री बांके बिहारी जी के श्रीचरणों का आश्रय कभी न छूटने की आर्त व भावभीनी प्रार्थना।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।