बांके बिहारी लाल मेरी लाज रखना

इंद्रेश जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन इंद्रेश जी महाराज
॥ दोहा ॥

दीनानाथ दयाल प्रभु, तुम ही हो रखवार।
इंद्रेश शरण में आ पड़ा, लाज रखो सरकार॥

॥ चौपाई ॥

बांके बिहारी लाल मेरी लाज रखना।
मेरी लाज रखना, मेरा ध्यान रखना॥
बांके बिहारी लाल मेरी लाज रखना॥

संसार में किसी का भरोसा नहीं है।
तेरे सिवा कोई सहारा नहीं है॥
डूबती नैया को किनारे पे करना।
बांके बिहारी लाल मेरी लाज रखना॥

पापों की गठरी सिर पे उठाई।
तेरे सिवा किसने बिगड़ी बनाई॥
अवगुण मेरे प्रभु क्षमा तुम करना।
बांके बिहारी लाल मेरी लाज रखना॥

इंद्रेश कहे हाथ जोड़ कन्हैया।
तुम ही हो मेरे जीवन खिवैया॥
चरणों में अपने सदा मुझको रखना।
बांके बिहारी लाल मेरी लाज रखना॥

॥ दोहा ॥

बांके बिहारी दीनबंधु, पतित पावन नाम।
इंद्रेश उर में वास करो, पूरण कीजो काम॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

ठाकुर श्री बांके बिहारी जी के चरणों में अपनी लाज, मान और जीवन की नैया सौंपने की अनन्य शरणागति।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।