बांके बिहारी के नैन कजरारे

मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण भजन भजन मृदुल कृष्ण शास्त्री
॥ दोहा ॥

तिरछी भौंहें तिरछे नैन, बांका मुकुट रसाल।
मृदुल कृष्ण के प्राणधन, बांके बिहारी लाल॥

॥ चौपाई ॥

बांके बिहारी के नैन कजरारे।
नैनन में जादू कर डारे॥
बांके बिहारी के नैन कजरारे॥

तिरछी नज़रिया जब से मारी।
सुधबुध भूली दुनिया सारी॥
घायल कर गए रूप तिहारे।
बांके बिहारी के नैन कजरारे॥

झांकी देखन जो भी आवे।
बिहारी जी का ही हो जावे॥
दर्शन देके भाग संवारे।
बांके बिहारी के नैन कजरारे॥

मृदुल कृष्ण कहे सांवरिया।
मन बस गयो तेरी बाँसुरिया॥
चरण कमल में दास तुम्हारे।
बांके बिहारी के नैन कजरारे॥

॥ दोहा ॥

कजरारे नैनन विषे, बसत अलौकिक नेह।
मृदुल कृष्ण बलिहारी जावे, पावन युगल सनेह॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

वृंदावन के लाडले ठाकुर श्री बांके बिहारी जी के सम्मोहक कजरारे नेत्रों और मनमोहक चितवन का रसमयी गुणगान।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।