॥ दोहा ॥
तिरछी भौंहें तिरछे नैन, बांका मुकुट रसाल।
मृदुल कृष्ण के प्राणधन, बांके बिहारी लाल॥
॥ चौपाई ॥
बांके बिहारी के नैन कजरारे।
नैनन में जादू कर डारे॥
बांके बिहारी के नैन कजरारे॥
तिरछी नज़रिया जब से मारी।
सुधबुध भूली दुनिया सारी॥
घायल कर गए रूप तिहारे।
बांके बिहारी के नैन कजरारे॥
झांकी देखन जो भी आवे।
बिहारी जी का ही हो जावे॥
दर्शन देके भाग संवारे।
बांके बिहारी के नैन कजरारे॥
मृदुल कृष्ण कहे सांवरिया।
मन बस गयो तेरी बाँसुरिया॥
चरण कमल में दास तुम्हारे।
बांके बिहारी के नैन कजरारे॥
॥ दोहा ॥
कजरारे नैनन विषे, बसत अलौकिक नेह।
मृदुल कृष्ण बलिहारी जावे, पावन युगल सनेह॥