॥ दोहा ॥
अद्भुत रूप सलोना कान्हा, कोटि मदन छवि हार।
राई लून उतारूँ प्यारे, नैनन प्रेमागार॥
॥ चौपाई ॥
बांके बिहारी कन्हैया हमारा, नज़र तोहे लग जाएगी।
काजल का टीको लगा दूं कान्हा, नज़र तोहे लग जाएगी॥
कमल नयन घुंघराले केशा, मोर मुकुट अति सोहे।
पीतांबर फहराए पवन में, सुर नर मुनि मन मोहे॥
बांके बिहारी कन्हैया हमारा, नज़र तोहे लग जाएगी॥
॥ दोहा ॥
वात्सल्य और प्रेम में डूबी, यशोदा सम दुलार।
साध्वी पूर्णिमा वारणे, जय जय नन्दकुमार॥