बड़ी देर भई नंदलाला तेरी राह तके बृजबाला

राजेंद्र कृष्ण
श्री कृष्ण भजन भजन कृष्ण
॥ दोहा ॥

बड़ी देर भई नंदलाला, तेरी राह तके बृजबाला।
ग्वाल बाल इक इक से पूछें, कहाँ है मुरली वाला॥

॥ चौपाई ॥

कोई न जाए कुंजन में, कोई न जाए मधुबन में।
सबकी आँखें खोज रही हैं, तुझको गोकुल भर में॥
बड़ी देर भई नंदलाला...

मुरली की वो तान सुना दे, सूखे मन में आस जगा दे।
ओ माखन के चोर कन्हैया, दर्शन अब तो दिखा दे॥
बड़ी देर भई नंदलाला...

यमुना के तट सूने पड़े हैं, कदंब की डारें रोती हैं।
तेरे बिना ओ कान्हा यहाँ, रातें भारी होती हैं॥
बड़ी देर भई नंदलाला...

॥ दोहा ॥

जय जय श्री राधे, जय जय श्री श्याम।
वृंदावन के बांके बिहारी, पूर्ण करो सब काम॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

गोकुल और वृंदावन के गोप-गोपियों की भगवान श्री कृष्ण के दर्शन के लिए व्याकुलता और उनके अनन्य विरह-प्रेम का सजीव वर्णन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।