॥ दोहा ॥
बड़ी देर भई नंदलाला, तेरी राह तके बृजबाला।
ग्वाल बाल इक इक से पूछें, कहाँ है मुरली वाला॥
॥ चौपाई ॥
कोई न जाए कुंजन में, कोई न जाए मधुबन में।
सबकी आँखें खोज रही हैं, तुझको गोकुल भर में॥
बड़ी देर भई नंदलाला...
मुरली की वो तान सुना दे, सूखे मन में आस जगा दे।
ओ माखन के चोर कन्हैया, दर्शन अब तो दिखा दे॥
बड़ी देर भई नंदलाला...
यमुना के तट सूने पड़े हैं, कदंब की डारें रोती हैं।
तेरे बिना ओ कान्हा यहाँ, रातें भारी होती हैं॥
बड़ी देर भई नंदलाला...
॥ दोहा ॥
जय जय श्री राधे, जय जय श्री श्याम।
वृंदावन के बांके बिहारी, पूर्ण करो सब काम॥