भटकत भटकत जग फिर्यो, पायो नहीं करार।
जब से खाटू पग धरयो, मिल्यो शांति भंडार॥
बाबा तेरा सहारा मुझे मिल गया, मेरी मुरझाई बगिया ये खिल गया।
बाबा तेरा सहारा मुझे मिल गया॥
पहले अंधेरा था जीवन में भारी, अब रोशनी है चारों तरफ तिहारी।
गम के वो बादल सारे छँट गए, खुशियों के दिन अब लौट के आए॥
तेरी कृपा से मुकद्दर संवर गया, बाबा तेरा सहारा मुझे मिल गया॥
तूने पकड़ा हाथ जब से सांवरिया, पार हो गई मेरी ये नैया।
सारे ज़माने से बेगाना हो गया, मैं तो तेरे प्यार का दीवाना हो गया॥
अमृत नाम मेरे दिल में उतर गया, बाबा तेरा सहारा मुझे मिल गया॥
संजय मित्तल शीश झुकाए, खाटू वाले के गुण गाए।
तेरी रहमत का कोई जवाब नहीं, खाटू जैसी कोई ठाठ नहीं॥
बाबा तेरा सहारा मुझे मिल गया, मेरी मुरझाई बगिया ये खिल गया॥
सहारा बेसहारे का, खाटू श्याम कन्हैया।
संजय मित्तल भव तरयो, पार भई है नैया॥