बाबा तेरा सहारा मुझे मिल गया

संजय मित्तल
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॥ दोहा ॥

भटकत भटकत जग फिर्यो, पायो नहीं करार।
जब से खाटू पग धरयो, मिल्यो शांति भंडार॥

॥ चौपाई ॥

बाबा तेरा सहारा मुझे मिल गया, मेरी मुरझाई बगिया ये खिल गया।
बाबा तेरा सहारा मुझे मिल गया॥

पहले अंधेरा था जीवन में भारी, अब रोशनी है चारों तरफ तिहारी।
गम के वो बादल सारे छँट गए, खुशियों के दिन अब लौट के आए॥
तेरी कृपा से मुकद्दर संवर गया, बाबा तेरा सहारा मुझे मिल गया॥

तूने पकड़ा हाथ जब से सांवरिया, पार हो गई मेरी ये नैया।
सारे ज़माने से बेगाना हो गया, मैं तो तेरे प्यार का दीवाना हो गया॥
अमृत नाम मेरे दिल में उतर गया, बाबा तेरा सहारा मुझे मिल गया॥

संजय मित्तल शीश झुकाए, खाटू वाले के गुण गाए।
तेरी रहमत का कोई जवाब नहीं, खाटू जैसी कोई ठाठ नहीं॥
बाबा तेरा सहारा मुझे मिल गया, मेरी मुरझाई बगिया ये खिल गया॥

॥ दोहा ॥

सहारा बेसहारे का, खाटू श्याम कन्हैया।
संजय मित्तल भव तरयो, पार भई है नैया॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

जीवन के अंधकार और निराशा के क्षणों में जब बाबा श्याम का सहारा मिला, तब जीवन में आनंद, सुख और शांति का सवेरा हुआ—यह कृतज्ञता व्यक्त की गई है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।