॥ दोहा ॥
शीश पगा न झगा तन में, प्रभु जाने को आहि बसे केहि ग्रामा।
पूजा सखी गावे मैत्री, जय जय सुदामा रामा॥
॥ चौपाई ॥
अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो।
दर पे सुदामा गरीब आ गया है॥
अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो॥
भटकते भटकते न जाने कहाँ से।
तुम्हारे महल के करीब आ गया है॥
न सर पे है पगड़ी न तन पे है जामा।
बता दो कन्हैया को नाम है सुदामा॥
सुदामा का सुनते ही दौड़े कन्हैया।
लगाया गले से वो गिरधर कन्हैया॥
बिठाया सिंहासन पे अश्रु बहाए।
चरण आंसुओं से प्रभु ने धुलाए॥
पूजा सखी गावे ये मैत्री निराली।
भरी दीनबंधु ने झोली वो खाली॥
अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो।
दर पे सुदामा गरीब आ गया है॥
॥ दोहा ॥
सखा भाव जग में अनुपम, कृष्ण सुदामा मीत।
पूजा सखी गावे सदा, पावन निर्मल प्रीत॥