अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो

मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण भजन भजन मृदुल कृष्ण शास्त्री
॥ दोहा ॥

शीश पगा न झगा तन में, प्रभु जाने को आहि बसे केहि ग्रामा।
धोती फटी सिलटी दुपटी, अरु पाँय उपानह की नहिं सामा॥

॥ चौपाई ॥

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो।
दर पे सुदामा गरीब आ गया है॥
अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो॥

भटकते भटकते न जाने कहाँ से।
तुम्हारे महल के करीब आ गया है॥
न सर पे है पगड़ी न तन पे है जामा।
बता दो कन्हैया को नाम है सुदामा॥

सुदामा का सुनते ही दौड़े कन्हैया।
लगाया गले से वो गिरधर कन्हैया॥
बिठाया सिंहासन पे अश्रु बहाए।
चरण आंसुओं से प्रभु ने धुलाए॥

मृदुल कृष्ण गावे ये मैत्री निराली।
भरी दीनबंधु ने झोली वो खाली॥
अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो।
दर पे सुदामा गरीब आ गया है॥

॥ दोहा ॥

सखा भाव जग में अनुपम, कृष्ण सुदामा मीत।
मृदुल कृष्ण गावे सदा, पावन निर्मल प्रीत॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भगवान श्री कृष्ण और उनके परम बाल सखा सुदामा जी के अलौकिक मिलन एवं निष्काम मैत्री का अत्यंत कारुणिक और प्रसिद्ध प्रसंग।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।