ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन

मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण भजन भजन मृदुल कृष्ण शास्त्री
॥ दोहा ॥

विष का प्याला राणा ने भेजा, पीवत मीरा हाँसी।
मृदुल कृष्ण प्रभु प्रेम में, भई श्याम की दासी॥

॥ चौपाई ॥

ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन।
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी॥
ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन॥

महलों में पली बन के जोगन चली।
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी॥
कोई कहे कुलनाशिनी कोई कहे बावरी।
मीरा तो श्याम रंग में रंग जाने लगी॥
ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन॥

विष का प्याला राणा ने भेजा।
हँसते हँसते मीरा ने अमृत समझा॥
श्याम कृपा से अमृत वो बन ही गया।
भक्ति रस का अमर दीप जलाने लगी॥
ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन॥

मृदुल कृष्ण गावे ये मीरा की प्रीत।
सच्चे प्रेम की जग में हुई सदा जीत॥
पायल बांध के घुंघरू नचाने लगी।
वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी॥
ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन॥

॥ दोहा ॥

मीरा के प्रभु गिरिधर नागर, सहज मिले अविनाशी।
मृदुल कृष्ण वंदन करे, चरण कमल सुख राशी॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्त शिरोमणि मीराबाई की भगवान श्री कृष्ण के प्रति अनन्य, निष्काम एवं समर्पित भक्ति की अमर गाथा।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।