आ नचियाँ दरबार ते संगता आ नचियाँ

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Durga Puja Bhajan
॥ दोहा ॥

आ नचियां दरबार, ते संगतां आ नचियां ॥

॥ चौपाई ॥

खुशियां दे विच, झूहमण सारे, वजदे ढोल नगाड़े,

जै जै, मंसा देवी मैया, लगदे ने जैकारे...

आ नचियां... ॥ दरबार...

श्रद्धा दे नाल, जो कोई वी, मां दे द्वारे आवे,

कदे ना खाली, मोड़े दाती, मुंह मांगिया वर पावे ॥

मांवां नूं एह, लाल बख्शदी, भैणां नूं मां भाई,,

हर मनशा, पूरी कर देंदी, मंसा देवी माई...

आ नचियां... ॥ दरबार...

भोले भाले, बच्चड़े मां दे, मां बच्चियां तों भौली,

पुत्त कुपुत्त ना, वेखे दाती, भरदी जावे झोली ॥

सभ ते करम, कमावे मैया, सभ दे काज संवारे,,

सभ दी विगड़ी, बन जांदी आ, आ के मां दे द्वारे...

आ नचियां... ॥ दरबार...

मां दी जोत तों, ज्योती मंगदे, चन्न सूरज ते तारे,

पापी वी जे, शरणी आवे, भव सागर तों तारे ॥

चार भुजावां, वाली मैया, करदी वारे नियारे,,

हाथ जोड़ के, आखे ममता, करदे पार उतारे...

॥ दोहा ॥

आ नचियां... ॥ दरबार...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।