आ दरश दिखा दे मेरी माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

आ दरश दिखा दे मेरी माँ,

तुझे तेरे लाल बुलाते है,

तुझे रो रो पुकारे मेरे नैन,

तुझे रो रो पुकारे मेरे नैन,

तुझे तेरे लाल बुलाते है,

आ दरश दिखा दे मेरी मां,

तुझे तेरे लाल बुलाते है ॥

आँखों के आंसू सूख चुके माँ,

अब तू दरश दिखा दे,

कब से खड़ा माँ दर पे तेरे,

मन की तू प्यास बुझा दे,

तेरी लीला निराली मेरी माँ,

तुझे तेरे लाल बुलाते है,

आ दरश दिखा दे मेरी मां,

तुझे तेरे लाल बुलाते है ॥

बीच भंवर में नैया पड़ी माँ,

आकर तू पार लगादे,

तेरे सिवा माँ कोई नहीं है,

आकर तू गले से लगा ले,

क्यूँ देर लगावे मेरी माँ,

तुझे तेरे लाल बुलाते है,

आ दरश दिखा दे मेरी मां,

तुझे तेरे लाल बुलाते है ॥

डूब रहा है सुख का सूरज,

गम की बदरिया है छाई,

उजड़ गयी बगिया जीवन की,

मन की कलि मुरझाई,

करे विनती ये सेवक माँ,

तुझे तेरे लाल बुलाते है,

आ दरश दिखा दे मेरी मां,

तुझे तेरे लाल बुलाते है ॥

आ दरश दिखा दे मेरी माँ,

तुझे तेरे लाल बुलाते है,

तुझे रो रो पुकारे मेरे नैन,

तुझे रो रो पुकारे मेरे नैन,

तुझे तेरे लाल बुलाते है,

आ दरश दिखा दे मेरी मां,

तुझे तेरे लाल बुलाते है ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।