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17809
साया बन के चलूँगी संग आपके
पारंपरिक
श्री राम
17810
खाटू के नज़ारे
पारंपरिक
श्री कृष्ण
17811
जय श्री श्याम का नारा
पारंपरिक
श्री कृष्ण
17812
जीवन तो भैया एक रेल है
पारंपरिक
माता दुर्गा
17813
कैसा सुंदर मृग मनोहर चरने आया है
पारंपरिक
श्री राम
17814
गरज रही रण बीच कालका
पारंपरिक
महादेव
17815
हे मेरी मैया तेरी हो रही जय जयकार
पारंपरिक
माता दुर्गा
17816
भक्तों की तुम भरती झोली खाली
पारंपरिक
माता दुर्गा
17817
तेरा नगरकोट स्थान ज्वाला महारानी
पारंपरिक
माता दुर्गा
17818
तूँ आप बजावें ढोलकी
पारंपरिक
माता दुर्गा
17819
मेरो भोले भंडारी गौरा से ऐसे बोल रहयो
पारंपरिक
महादेव
17820
भक्त तेरे यहाँ बैठे है
पारंपरिक
माता दुर्गा
17821
होली खेले भोलेनाथ
पारंपरिक
श्री गणेश
17822
मैया दिल में धीरज बांधो मोहे कछु ना होयगो
पारंपरिक
विष्णु भगवान
17823
राधे तु कितनी प्यारी है
पारंपरिक
श्री कृष्ण
17824
रंग लगाए श्याम मेरे
पारंपरिक
श्री कृष्ण
17825
पर्वत पे उड़े रे गुलाल होली खेले लांगुरिया
पारंपरिक
माता दुर्गा
17826
होली खेलन आजा रे मोहन
पारंपरिक
श्री कृष्ण
17827
रूठी हुई गोरा को मनाऊ कैसे
पारंपरिक
महादेव
17828
नौ देवी की जल रही ज्योत
पारंपरिक
माता दुर्गा
17829
मेरी क़िस्मत का सितारा
पारंपरिक
श्री कृष्ण
17830
हर ख़ुशी मिलती मुझे खाटू आ जाने से
पारंपरिक
श्री कृष्ण
17831
श्याम मेरा जीवन भी गुलज़ार कर दे
पारंपरिक
श्री कृष्ण
17832
जबसे हुई है तेरी मेहरबानी
पारंपरिक
श्री कृष्ण