दिखा रहे हैं 24 भजन (पृष्ठ 741 / 5665, कुल 135,942 भजनों में से)
17761
देवों में सबसे अलबेला काम मुर्लियावाले का पारंपरिक
श्री कृष्ण
17762
चिता की भस्म रमा के पारंपरिक
महादेव
17763
मालिक तेरे जहांन में पारंपरिक
श्री कृष्ण
17764
मेरे दिल को छू गई है मुस्कान तेरी प्यारी पारंपरिक
श्री कृष्ण
17765
म्हारी रनुबाई थारा आंगनिया मैं मोर बोले पारंपरिक
माता दुर्गा
17766
राम नाम तू भज ले रे बन्दे पारंपरिक
श्री राम
17767
चलता चल रे भक्ता महाकाल सवारी में पारंपरिक
महादेव
17768
मुरली वाले ने घेर लयी अकेली बनिया गयी पारंपरिक
श्री कृष्ण
17769
बालासा थानै कौन सजायो जी लखबीर सिंह लक्खा
हनुमान जी
17770
बैठ नजदीक तूं सांवरे के पारंपरिक
श्री कृष्ण
17771
चांद जैसा मुखड़ा मां का बैठी है दरबार में पारंपरिक
माता दुर्गा
17772
दानी होकर क्यूँ चुप बैठा पारंपरिक
श्री कृष्ण
17773
तेरे चरणों में मैं रूल जावां पारंपरिक
श्री कृष्ण
17774
बृजवासी कान्हा थारी पारंपरिक
महादेव
17775
मेरे सद्गुरुजी को लाख बार वंदना पारंपरिक
श्री कृष्ण
17776
हिमालय नगरी देखो रे भैया पारंपरिक
महादेव
17777
कठे से आयो श्याम शंकर हनुमान पारंपरिक
हनुमान जी
17778
हारे को मिलती जीत जहाँ पारंपरिक
श्री कृष्ण
17779
युगो युगो से जिसको वेदो ने वखानी राम कहानी पारंपरिक
श्री राम
17780
तू अपना हाल सुनाएं जा पारंपरिक
श्री कृष्ण
17781
मैं फिर से खाटू आ गया पारंपरिक
श्री कृष्ण
17782
जबसे तेरी लगन लगी दिल हुआ दीवाना है पारंपरिक
श्री कृष्ण
17783
करके प्रीत पछताई रे बेदर्दी सांवरिया से पारंपरिक
श्री कृष्ण
17784
छलिया बड़ो री कन्हैया मैं कैसी करूं पारंपरिक
श्री कृष्ण