भगिनी निवेदिता

पारंपरिक
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Sister Nivedita Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल: भगिनी निवेदिता

वास्तविक नाम - मार्गरेट एलिजाबेथ नोबल

अन्य नाम - भगिनी निबेदिता

गुरु - स्वामी विवेकानन्द

आराध्य - माँ काली

जन्म – 28 अक्टूबर 1867

जन्म स्थान - डुंगानोन, काउंटी टायरोन, उत्तरी आयरलैंड, यूनाइटेड किंगडम

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

भाषा - स्कॉटिश, अंग्रेजी, बंगाली

पिता - सैमुअल रिचमंड नोबल

माता - मैरी इसाबेल

संस्थापक - रामकृष्ण सारदा मिशन सिस्टर निवेदिता गर्ल्स स्कूल

सिस्टर निवेदिता, आयरिश मूल की हिंदू नन थीं जो स्वामी विवेकानन्द की शिष्या थीं। वह महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा की प्रबल समर्थक थीं और उन्होंने रामकृष्ण मिशन के विकास में प्रमुख भूमिका निभाई थी।

भगिनी निवेदिता का जन्म डबलिन, आयरलैंड में हुआ था, उनकी मुलाकात स्वामी विवेकानन्द से शिकागो में विश्व धर्म संसद में हुई थी। वह उनकी शिक्षाओं से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने हिंदू नन बनने का फैसला किया। उन्होंने निवेदिता नाम लिया, जिसका अर्थ है "भगवान को समर्पित"। निवेदिता 1898 में भारत लौट आईं और महिलाओं के लिए स्कूल और अस्पताल स्थापित करने के लिए स्वामी विवेकानन्द के साथ काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने गरीबों और पीड़ितों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी काम किया।

उन्हें स्वामी विवेकानन्द के साथ घनिष्ठ संबंध के लिए भी याद किया जाता है, जो भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक थे और रामकृष्ण की पत्नी सारदा देवी की सबसे करीबी सहयोगियों में से एक रहीं। सिस्टर निवेदिता भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण हस्ती हैं। उन्हें शिक्षा, सामाजिक सुधार और महिला अधिकारों के क्षेत्र में उनके काम के लिए याद किया जाता है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्तमाल: भगिनी निवेदिता | Bhaktamal: Sister Nivedita

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।