रमेश बाबा

पारंपरिक
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Ramesh Baba Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल: रमेश बाबा

अन्य नाम - रमेश पुरी महाराज, श्री रामेश्वर प्रसाद शुक्ला

आराध्य - श्रीकृष्ण

जन्म - पौष कृष्ण सप्तमी | सन 1938

जन्म स्थान - प्रयाग, उत्तर प्रदेश

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

गोलोक गमन - मंगलवार, 6 अक्टूबर 202 | इंदिरा एकादशी | बरसाना

भाषा - अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत

माता - श्रीमती हेमेश्वरी देवी

पिता - श्री बल्देव प्रसाद शुक्ल

प्रसिद्ध - मान मंदिर के प्रमुख, भारतीय आध्यात्मिक गुरु, भक्ति गायक, माताजी गौशाला के संस्थापक

पुरस्कार - पद्मश्री

तीर्थराज प्रयाग में जन्मे बाबा रमेश पुरी महाराज ब्रज के पर्यावरणविद और संत हैं। बाबा ने ब्रज के पौराणिक स्वरूप को बचाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है। इन्हें आम तौर पर ब्रज रसिकों द्वारा ब्रज के विरक्त संत की उपाधि दी गयी है। उन्हें पर्यावरण का संत भी कहा जाता है। इसके पीछे कारण यह है कि उन्होंने ब्रज के वन उपवनों और कृष्ण लीला से जुड़ी प्राचीन पहाड़ियों के लिए कई दशकों तक जन आंदोलन चलाया था।

बाबा ने प्रयाग में ही शिक्षा प्राप्त की। उनके भीतर का आध्यात्मिक प्रकाश उन्हें सदैव अपना घर-बार छोड़कर ब्रज आने के लिए प्रेरित करता था। करीब 40 साल पहले रमेश बाबा राधारानी मंदिर में मृदनाग बजाते थे। राधा नाम के प्रचार-प्रसार में रमेश बाबा का भी बहुत योगदान रहा।

संत रमेश बाबा को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान गौ सेवा के लिए दिया गया है। बरसाना के गहवरवन स्थित गौशाला माताजी में 50 हजार से ज्यादा गायें मौजूद हैं। रमेश बाबा ने गायों और अन्य जानवरों के लिए एक अस्पताल बनाया है। रमेश बाबा के नेतृत्व में हर वर्ष राधारानी ब्रज यात्रा का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं और ब्रज की परिक्रमा करते हैं।

राधारानी के अनन्य भक्त एवं विख्यात गौसेवक पद्मश्री रमेश बाबा महाराज का 88 वर्ष की उम्र में बरसाना के मान मंदिर में निधन हो गया। लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे पूज्य बाबा ने मंगलवार 6 अक्टूबर 2026, इंदिरा एकादशी की पुण्य तिथि को अंतिम सांस लेकर गोलोक धाम की ओर प्रस्थान किया। एशिया की सबसे बड़ी गौशाला की नींव रखने और ब्रज रज की रक्षा के लिए आजीवन समर्पित रहे संत का जाना समूचे ब्रजमंडल और आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

Ramesh Baba | रमेश बाबा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।