मन शीतल हो गया जोगियां

पारंपरिक
माता लक्ष्मी आरती बाबा बालक नाथ भजन lakshmi
॥ पावन पाठ ॥

मन शीतल हो गया जोगियां दर्शन तेरे करके,

भुजे प्यास न अखियां दी भावे तक लिया है जी भर के,

मन शीतल हो गया जोगियां दर्शन तेरे करके,

अमृत वेले दर तेरे ते अमृत वरदा सी,

श्रद्धा नाल पुजारी तेरी आरती करदा सी,

दुःख टूट गए संगता दे तेरा रोट हाथा विच फड़ के,

मन शीतल हो गया जोगियां दर्शन तेरे करके,

गेहरू रंगे केश तेरे लक्ष्मी दे बालका वे,

रत्नो दिया गोआ चारिया दुनिया दे मालका वे,

दिल करे न चकन नू तेरे चरना विच सिर धर के,

मन शीतल हो गया जोगियां दर्शन तेरे करके,

चन तारे ते सूरज तनु शीश निभाउंदे ने,

देवी देवते तेरी गुफा ते फूल बरसौंदे ने,

तर गये अमन ते पिरती भी सिद्ध योगी दा लढ़ फड् के,

मन शीतल हो गया जोगियां दर्शन तेरे करके,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।