अम्बे तू है जगदम्बे काली

पारंपरिक स्तुति
माता दुर्गा आरती आरती दुर्गा
॥ दोहा ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

॥ चौपाई ॥

तेरे भक्त जनों पर माता, भीड़ पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिंहों की बलशाली, अष्ट भुजाओं वाली।
दुखियों के दुःखड़े निवारती...
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

माँ बेटे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत कपूत सुने हैं पर ना, माता सुनी कुमाता॥
सब पर करुणा बरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली।
कष्टों को पल में बिसारती...
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें माँ तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली।
सतियों के सत को संवारती...
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

॥ दोहा ॥

चरण शरण में आए हैं हम, रखियो लाज हमारी।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

माँ दुर्गा और काली की यह भावपूर्ण आरती मातृ-कृपा और शरणागति का अनुपम उदगार है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।