कुशेश्वर नाथ अस्तोत्र

पारंपरिक
माता लक्ष्मी स्तोत्र विविध भजन lakshmi
॥ पावन पाठ ॥

कुशेश्वर नाथ स्त्रोत्र

सदा वसन्तं गिरिजा-समेतम्

गणनाथ नाथं, प्रभु विश्वनाथम्।

करुणा स्वरुपं, प्रभु सौम्य रूपम्

गिरिजा कुशेश्वर प्रणमामि नित्यम्।।

1 कृपा कान्त करुणा स्वरुपं दयालु।

देवाधिदेवं प्रभुप्राणनाथम्।

अनाथस्य नाथं, जगद्बन्धु देव

गिरिजा कुशेश्वर प्रणमामि नित्यम्।।

2 प्राच्यां सदा कौशिकी श्री स्वरुपम्।

प्रतीच्यां च कमला सती संग दिव्यम्।

मध्येविभासित प्रभु सौख्यरुपम्

गिरिजा कुशेश्वर प्रणमामि नित्यम्।।

3 गले नागराजं सदा दिव्यभालम्

शशि शेखर शूल हस्तेकपालम्।

स्मितब्याघ्र चर्माम्बरंदिव्यमालाम्

गिरिजा कुशेश्वर प्रणमामि नित्यम्।।

4 वृषारुढ हस्ते त्रिशूलं गम्भीरम्

सदा देवतार्चित उमा संग शम्भू।

हर:दु:ख दारिद्र,पूर्णस्य पूर्णम्

गिरिजा कुशेश्वर प्रणमामि नित्यम्।।

5 गिरिजा कुशेश्वर स्त्रोत्रं,

य: पठेत्श्रद्धयान्वित:।

ऐश्वर्य श्री प्राप्नोति, कुशेश्वरस्य प्रसादत:।।

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।