तू दयाल दीन हौं तू दानी हौं भिखारी

पारंपरिक
श्री राम आरती राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तू दयाल, दीन हौं,

तू दानी, हौं भिखारी ।

हौं प्रसिद्ध पातकी,

तू पाप पुंज हारी ॥

नाथ तू अनाथ को,

अनाथ कौन मोसो ।

मो सामान आरत नाही,

आरती हर तोसो ॥

ब्रह्मा तू, जीव हौं,

तू ठाकुर, हौं चेरो ।

तात मात गुरु सखा,

तू सब विधि ही मेरो ॥

तोही मोहि नाते अनेक,

मानिए जो भावे ।

ज्यो त्यों तुलसी कृपालु,

चरण शरण पावे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।