शिव पंचाक्षर स्तोत्र

पारंपरिक
महादेव स्तोत्र शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय,

भस्माङ्गरागाय महेश्वराय,

नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय,

तस्मै न काराय नमः शिवाय,

हो तेरी गोद में न जाने,

कितने युग हैं मेरे बीतें,

मुझको तुम मिल जाओ इक दिन,

ऐसी आस में हम जीते,

तेरी शरण जो आया,

सारी दुनिया भुलाया,

तेरी भक्ति पाके दुनिया में,

नाम कमाया,

तो बोलो हर हर,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा....

तो बोलो शम्भू,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा....

हो मन्दाकिनी सलिल,

चन्दन चर्चिताय,

नंदीश्वराय प्रमथनाथ महेश्वराय,

मंदारा पुष्प बहु,

पुष्प सुपूजितया,

तस्मै न काराय नमः शिवाय,

शिवाय गौरी वादनाब जबृन्दा,

सूर्याय दक्ष ध्वरा नाशकाय,

श्री नीलकंठाय अमृत वजाय,

तस्मै शि काराय नमः शिवाय,

हो तेरे भक्तों को है तूने,

अपने सीनें से लगाया,

रातों में सपनों में आके,

तुनें दरस दिखाया,

तेरे दरपे जो भी आया,

संग उसके तेरा साया,

जिसनें मांगा जो भी तुझसे,

झोली भरकर पाया,

तो बोलो हर हर,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

तो बोलो शम्भू,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा.....

हो वशिष्ठ कुम्भो,

दवगौतमर्या मुनीन्द्र देवा,

चिरता शेखराय,

चंद्रका वैश्वा नर लोचनाय,

तस्मै वकारया नमः शिवाय,

रक्षा स्वरूपाया जटाधराय,

पिनाका हस्ताय सनातनाय,

दिव्याय देवाय दिगम्बराय,

तस्मै वकार्याय नमः शिवाय,

तो बोलो हर हर,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

तो बोलो शम्भू,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा,

हो शिवा शिवा,

हे शिवा शिवा,

हो करते हैं तेरी तपस्या,

तू हल करता हर समस्या,

तुझे ढूंढूं कहाँ किस गलियों में,

खोल दे रहस्या,

भवसागर से पार उतारो,

सबकी बिगड़ी को संवारो,

आये शरण तिहारो,

मिलकर शिव का नाम पुकारो।

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं,

यह पठेच्छिव सन्निधव,

शिवलोकमवाप्नोति,

शिवेन सह मोदते,

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं,

यह पठेच्छिव सन्निधव,

शिवलोकमवाप्नोति,

शिवेन सह मोदते।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।