दर का भिखारी शम्बू मुझे ठुकराना ना

पारंपरिक
महादेव आरती शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दर दा भिखारी शम्बू, मैनू ठुकरावीं ना ।

जग ने रुलाया शम्बू, तू वी रुलावी ना ॥

चाँद ते सितारे तेरी आरती उतारदे,

गांदे ने गीत भोले नित्त तेरे प्यार दे ।

दासां तो उदास होके, दर तों उठावी ना,

जग ने रुलाया शम्बू, तू वि रुलावी ना ॥

धी पुत्त सो सो गलतीयां करदे,

माँ बाप ज़रा वी ना वलवला करदे ।

गलतियाँ मेरिया नु, दिल ते लावी ना,

जग ने रुलाया शम्बू, तू वि रुलावी ना ॥

तेरा दर छोड़ के कहदे दर जावां,

जग है पराया, किसे अपना बनावा ।

सारे दर के छोड़ के मैं तेरा दर मलेआ,

जग ने रुलाया शम्बू, तू वि रुलावी ना ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।