ताश मिल खेलो सांवरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण स्तोत्र कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ताश मिल खेलो सांवरिया

जय श्री राधे वल्ल्भ श्याम,

ताश मिल खेलो साँवरिया.....

जिसमे बादशाह बनवारी,

जिसमे बेगम राधा प्यारी,

जिसमे दूलो है गिरधारी,

ताश खेलो सांवरिया......

जिसमे दस्सी दसो दिशाए,

जिसमे नोकी नवदुर्गा है,

जिसमे अट्ठी अष्टकमल है,

ताश खेलो सांवरिया,...

जिसमे सत्ती सप्तऋषि है,

जिसमे छग्गी छह ऋतुएँ है,

जिसमे पंची पञ्चतत्व है,

ताश खेलो सांवरिया....

जिसमे चौकी चार वेद है,

जिसमे तिग्गी तीन लोक है,

जिसमे दुग्गी चाँद सूरज है,

ताश खेलो सांवरिया,......

जिसमे इक्का इक संसार,

कर लो नारायण से प्यार,

यही है इस दुनिया का सार,

ताश मिल खेलो सांवरिया,

जय श्री राधे वल्ल्भ श्याम,

ताश मिल खेलो साँवरिया।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।