खूब लड़ी मर्दानी वह थी झांसी वाली रानी

माधुरी मिश्रा
माता लक्ष्मी आरती देश भक्ति भजन lakshmi
॥ पावन पाठ ॥

बुंदेले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी |

खूब लड़ी मरदानी वह थी, झाँसी वाली रानी ||

इस समाधि में छिपी हुई है, एक राख की ढेरी |

जल कर जिसने स्वतंत्रता की, दिव्य आरती फेरी ||

यह समाधि यह लघु समाधि है, झाँसी की रानी की |

अंतिम लीलास्थली यही है, लक्ष्मी मरदानी की ||

यहीं कहीं पर बिखर गई वह, भग्न-विजय-माला-सी |

उसके फूल यहाँ संचित हैं, है यह स्मृति शाला-सी |

सहे वार पर वार अंत तक, लड़ी वीर बाला-सी |

आहुति-सी गिर चढ़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला-सी |

बढ़ जाता है मान वीर का, रण में बलि होने से |

मूल्यवती होती सोने की भस्म, यथा सोने से ||

रानी से भी अधिक हमे अब, यह समाधि है प्यारी |

यहाँ निहित है स्वतंत्रता की, आशा की चिनगारी ||

जाओ रानी याद करेंगे ये कृतज्ञ भारत वासी |

तेरा यह बलिदान जगावेगा स्वतन्त्रता अविनाशी |

होवे चुप इतिहास लगे सच्चाई को चाहे फ़ासी |

तेरा स्मारक तू ही होगी,तू खुद अमिट निशानी |

बुंदेले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी |

खूब लड़ी मरदानी वह थी, झाँसी वाली रानी ||

झांसी वाली रानी...झांसी वाली रानी.....

गायिका - माधुरी मिश्रा

संगीत - माधुरी मिश्रा

गीत - सुभद्रा कुमारी चौहान

स्वर - माधुरी मिश्रा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।