हम सब आये है तुम्हारे द्वार पे

पारंपरिक
महादेव आरती शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

त्रिपुरारी ओ भोले भंडारी आओ न विषधारी हमारी पुकार पे,

हम सब आये है तुम्हारे द्वार पे

गले में बाबा सरप विराजे गामंग है पार्वती,

दीपक लेकर के दर में भक्त करे है तेरी आरती,

इक बारी आओ दर्श दिखो हम भी दास है तेरे,

ओ कैलाशी काशी के वासी तुम हो अविनाशी,

जटा में गंग धार के हम सब आये है तुम्हारे द्वार पे

त्रिपुरारी ओ भोले भंडारी आओ न विषधारी हमारी पुकार पे,

बस्मा सुर को तूने मारा भक्तो को तो तारा रे,

जब जब भीड़ पड़ी भगतो पे छोड़ समाधि आया रे,

जय जय शंकर जय जय पर्लयंकर जय हो गोरी शंकर,

दिल से चाहे के नित उठ ढाये तुम्ही को मनाये,

प्रभु करदो भव से पार रे हम सब आये है तुम्हारे द्वार पे

त्रिपुरारी ओ भोले भंडारी आओ न विषधारी हमारी पुकार पे,

भुत नाथ बाबा भूतो के स्वामी अन धन का भण्डार भरो,

धरलो हर्लो दुःख हमारा जीवन का कल्याण करो,

बालक तेरी महिमा गाये सारे जग को सुनाये,

त्रिपुरारी ओ भोले भंडारी लेवो जी सुधि हमारी तेरा ही आधार रे,

हम सब आये है तुम्हारे द्वार पे

त्रिपुरारी ओ भोले भंडारी आओ न विषधारी हमारी पुकार पे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।