जय जय माँ विच पहाड़ां दे माँ तेरी ज्योत जगे

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय जय माँ विच पहाड़ां,

दे माँ तेरी ज्योत जगे,

रानी माँ......

सुहा सुहा चोला तेरे अंग विराजे

केसर तिलक लगे,

रानी माँ......

पंजा पंजा पॉडंवा ने भवन बना़या,

मॉ पिन्डी रूप धरे ,

भोली माँ.......

किशमिश मेवा तेरे भोग लगाया

आरती देव करे,

जै जै माँ........

गंगा जल पावन निर्मल धारा

माँ तेरे चरण धोये,

वैष्णो माँ....

नंगे नंगे पैरी राजा अकबर आया

माँ तेरी पूजा करे,

अम्बे माँ....

तू ही मईया वैष्णो मॉ सरस्वती,

मॉ काली खड़ग धरे,

दुर्गा माँ....

बैठी भवन में जग कल्याणी,

हनुमन्त चँवर करें,

नैना माँ....

ब्रह्मा विष्णू शंकर ध्यावें,

नित्त तेरा ध्यान धरें,

जननी माँ....

दर्शन दो मईया द्वार खड़े है,

ममता की छाया तले,

प्यारी माँ.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।