मान जाना दाई वो

श्री शेसनारायण गौतम गुरु जी
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मान जाना दाई वो, मान जाना वो॥

आरती थारी हुम अगियारी खाड़ा खप्पर तोर दुवारी।

झन रिसियाना दाई वो.....

का मंतर जंतर मा दाई, मै हर तोला रिझावव माँ

नई जनाव तोर मान मनेाती,कइसे के तोला मनावव माँ

तोर सेवा बर ओसरी पारी।सकलाये सगरो नर नारी।

अब थिरयाना दाई वो.....

दसो अंगूरी ले घेरी बेरी,नत नत अरजी गुजारव वो

मन मंदिर में तोरे नाव के सरधा के दियना बारव वो

तिहि दुनिया के हस रखवारी।कतको रूप के सिरजन हारी।

मोरो पतियाना दाई वो.....

तोर दिये अन धन परसादी,तोहिच बर ओ चघाये हव

नरियर भेला पान सुपारी,काचा लिमऊ मढाये हव

कारी पियर चाऊर भारी।बनथे बनॉकि तोर सहारी।

झन चिचियाना दाई वो.....

मया पबरित निछमल बंधना,दाई तिहि गाडियाये वो

फेर काबर दुलरू लइका बर,माता तै रिसियाये वो

सांत होगे जग के महतारी।गौतम तरस दरस बलीहारी।

तै सुरताना दाई वो.....

गायक-दिवेश साहू

संगीतकार-राहुल एवं शेखर

मांदर वादक-चतुर मानिकपुरी

मंजीरा-योगश नीरज

कोरस- शुभम राजा नीरज

रचनाकार- श्री शेसनारायण गौतम गुरु जी

प्रेसक- जय माँ चण्डी सेवा एवं भजन मंडली लाखे नगर रायपुर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।