बहुचर माँ की आरती

पारंपरिक
माता लक्ष्मी आरती Aarti Bahuchar Mata Ki Aarti Aarti
॥ दोहा ॥

॥ बहुचर माँ की आरती ॥

॥ चौपाई ॥

खम्मा खम्मा रे बहुचर मात

माड़ी हूँ तो प्रेमे उतारूँ तारी आरती।

बाला स्वरूपे तारो वास,

माड़ी हूँ तो प्रेमे उतारूँ तारी आरती॥

खम्मा खम्मा रे बहुचर मात

माड़ी हूँ तो प्रेमे उतारूँ तारी आरती॥

हो….. बहुचर माँ….. जय हो तारो बहुचर माँ…..

दरिया जेवी माड़ी तारो महिमा अपरंपार,

तारो पालव पकड़े एनो पल माँ बेड़ो पार।

तारा शरण नो हूँ तो दास,

माड़ी हूँ तो प्रेमे उतारूँ तारी आरती॥

खम्मा खम्मा रे बहुचर मात

माड़ी हूँ तो प्रेमे उतारूँ तारी आरती॥

निर्धन ने तू वैभव देती, देती सुख भंडार,

वंश तणी तू वेल वधारे, पुत्र अने परिवार।

सौना मनडानी पूरे आश,

माड़ी हूँ तो प्रेमे उतारूँ तारी आरती॥

Santo Ki Vani Lyrics

खम्मा खम्मा रे बहुचर मात

माड़ी हूँ तो प्रेमे उतारूँ तारी आरती॥

माड़ी तारा दर्शन करता पापी पावन थाय,

माड़ी तारी भक्ति करता आनंद मंगल थाय।

हे, भक्तो ने पाको विश्वास,

माड़ी हूँ तो प्रेमे उतारूँ तारी आरती॥

खम्मा खम्मा रे बहुचर मात

॥ दोहा ॥

माड़ी हूँ तो प्रेमे उतारूँ तारी आरती॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।