अनुराधा पौडवाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Anuradha Paudwal Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्त गायिका | अनुराधा पौडवाल

असली नाम - अलका नाडकर्णी

जन्म - 27 अक्टूबर 1954 (आयु 68 वर्ष)

जन्म स्थान - कारवार, कर्नाटक, भारत

वैवाहिक स्थिति: विवाहित

कई भाषाओं में गाने - गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मराठी, संस्कृत, बंगाली, तमिल, तेलुगु, उड़िया, असमिया, पंजाबी, भोजपुरी, नेपाली और मैथिली।

पति- अरुण पौडवाल

बेटी - कविता पौडवाल

व्यवसाय - पार्श्व गायक, भजन गायक

सम्मान - भारत सरकार द्वारा पद्मश्री

डी.लिट की मानद उपाधि. डी वाई पाटिल विश्वविद्यालय द्वारा

अनुराधा पौडवाल एक भारतीय पार्श्व गायिका हैं जो मुख्य रूप से हिंदी सिनेमा में काम करती हैं। मीडिया में उन्हें सबसे प्रमुख भजन गायकों में से एक और बॉलीवुड के 80 और 90 के दशक के सबसे सफल पार्श्व गायकों में से एक के रूप में वर्णित किया गया है।

उन्होंने 1973 से अपनी संगीत यात्रा शुरू की। उन्होंने लगभग चार दशकों तक फिल्मी गीतों और भजनों के साउंडट्रैक के माध्यम से गाया है। उनके छठ गीत बेहद लोकप्रिय हैं और यूट्यूब पर 47 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है। उनका गायत्री मंत्र बेहद लोकप्रिय है और यूट्यूब पर इसे 220 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है। उनकी शिव अमृतवाणी अत्यधिक लोकप्रिय हो गई है और YouTube पर सामूहिक रूप से 250 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है। उनके द्वारा रिकॉर्ड की गई हनुमान अमृतवाणी को यूट्यूब पर 450 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है। उनके द्वारा गाए गए शिव भजन और दुर्गा भजन भारत में बेहद लोकप्रिय हैं।

उन्होंने कई भाषाओं में हजारों गाने गाए हैं। उन्होंने ग्यारह नामांकनों में से चार फिल्मफेयर पुरस्कार जीते हैं। उन्हें भारत सरकार द्वारा 4 फिल्मफेयर पुरस्कार, 1 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्म श्री सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। अनुराधा पौडवाल गानों से कमाए गए पैसों का इस्तेमाल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों की मदद करने, गरीब परिवारों को बिजली मुहैया कराने और कुपोषण की समस्या को हल करने में करती हैं।

अनुराधा पौडवाल के कुछ प्रसिद्ध भजन, आरती, मंत्र:

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

अनुराधा पौडवाल | Anuradha Paudwal - Ekata Samantaray

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।