दिखा रहे हैं 24 भजन (पृष्ठ 679 / 5665, कुल 135,942 भजनों में से)
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काशी के वासी है अविनाशी पारंपरिक
महादेव
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अगला जन्म भी सांवरे पारंपरिक
श्री कृष्ण
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कब आओगे मुरलिया वाले पारंपरिक
श्री कृष्ण
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हरि के बिना रे तेरी कैसे हो जाए मुक्ति संत कबीर
श्री कृष्ण
16277
श्याम गोकुल में फिर से तू आजा पारंपरिक
श्री कृष्ण
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भगवान तुम्हारी गीता में पारंपरिक
श्री कृष्ण
16279
सारे जग में डंका बाजे पारंपरिक
श्री कृष्ण
16280
हारे के सहारे मेरी सुनले पुकार पारंपरिक
श्री कृष्ण
16281
वो है श्यामधणी पारंपरिक
श्री कृष्ण
16282
दिन हो वो ग्यारस का पारंपरिक
श्री कृष्ण
16283
क्या ऐसी नाराज़ी है पारंपरिक
श्री कृष्ण
16284
लो हारी मैं तो हारी हूँ पारंपरिक
श्री कृष्ण
16285
कबसे खड़ी हूँ थारे द्वार पे पारंपरिक
श्री कृष्ण
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वाह रे वाह हनुमान जी रामश्रीवादी अनुरोध
हनुमान जी
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बरस रही राम रस भक्ति पारंपरिक
श्री राम
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हे कान्हा मोहे, बहुत सतावत तोरी अखियां पारंपरिक
श्री कृष्ण
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जब जब हम पर विपदा आई पारंपरिक
श्री कृष्ण
16290
तेरे नाल गुरुजी रैनगे पारंपरिक
अन्य
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जरा सोचले होगी तेरी हंसाई पारंपरिक
श्री कृष्ण
16292
मेरे रघुनन्दन घर आये पारंपरिक
श्री राम
16293
भजन हरि का करले अभिमानी पारंपरिक
श्री राम
16294
अँखियाँ दे विच सोना श्याम वसदा पारंपरिक
श्री कृष्ण
16295
जय राधे जय राधे पारंपरिक
श्री कृष्ण
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बाला जी हमारा साथ कभी ना छोड़ना पारंपरिक
हनुमान जी