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साँवरे की सेवा में जो मस्ती
- रवि शर्मा (श्रीगंगानगर)
श्री कृष्ण
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सुनता है तू सबकी
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4227
म्हारे घरा आओ एक बार बाबा
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4228
जब जब घूमे बाबा थारी मोरछड़ी
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4229
भक्त है श्री राम के हम भक्त है श्री राम के
पारंपरिक
श्री राम
4230
गिरतो को सम्बाला है हर मुश्किल को टाला है
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4231
तू मेरा वेलेंटाइन है
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4232
तेरे खाटू में आकर रुकना जरुरी हो गया
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4233
देवी तलाब भी दुनिया अंदर तीर्थ है महामाई दा
पारंपरिक
माता दुर्गा
4234
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में है
गोविन्द भार्गव
श्री कृष्ण
4235
ओ खाटू वाले बाबा मेरी लाज रखो
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4236
कान्हा कान्हा कब से पुकारू हर पल
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4237
ओहदा बाल वींगा नहीं हो सकदा
पारंपरिक
माता दुर्गा
4238
बताये दो बताये दो कहा गई भवानी
पारंपरिक
हनुमान जी
4239
बाबा मेरे खाटू वाले तू कर दे उजाले अँधेरे मन में
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4240
मांगे मोसे चन्द्र खिलौना
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4241
म्हे भी आवंगा
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4242
निहारु मैं सुबहो शाम तुझको
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4243
बाबा मेरे खाटू वाले
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4244
अर्जी तू मेरी सुनले मेरी मैया शेरोवाली
पारंपरिक
माता दुर्गा
4245
अखा नु उडीका तेरियां
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4246
गुरु चरना दे उत्ते मत्था जदो टेकेया
अलका गोएल
अन्य
4247
सँवारे सलोने जैसा यार मिल गया
पारंपरिक
श्री कृष्ण
4248
तन भी खाटू मन भी खाटू
पारंपरिक
श्री कृष्ण