सर्वे भवन्तु सुखिनः (शांति पाठ)

बृहदारण्यकोपनिषद् / पारंपरिक वैदिक
अन्य श्लोक श्लोक शांति
॥ दोहा ॥

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

॥ चौपाई ॥

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥

सरल भावार्थ:
संसार में सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त (आरोग्यवान) हों। सभी का जीवन कल्याणमय और शुभ हो, और किसी को भी किसी प्रकार का दुःख न सहना पड़े।

सनातन दृष्टि:
यह श्लोक सनातन संस्कृति की वैश्विक मंगल-कामना (वसुधैव कुटुम्बकम्) का सर्वोच्च प्रमाण है, जिसमें केवल किसी एक संप्रदाय नहीं अपितु संपूर्ण चराचर जगत के कल्याण की प्रार्थना की गई है।

॥ दोहा ॥

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः।
वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

समस्त मानवता और जीवमात्र के सुख, स्वास्थ्य और कल्याण की यह सनातन वैदिक प्रार्थना भारतीय जीवन मूल्यों का सर्वोच्च उद्घोष है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।