ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
सरल भावार्थ:
संसार में सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त (आरोग्यवान) हों। सभी का जीवन कल्याणमय और शुभ हो, और किसी को भी किसी प्रकार का दुःख न सहना पड़े।
सनातन दृष्टि:
यह श्लोक सनातन संस्कृति की वैश्विक मंगल-कामना (वसुधैव कुटुम्बकम्) का सर्वोच्च प्रमाण है, जिसमें केवल किसी एक संप्रदाय नहीं अपितु संपूर्ण चराचर जगत के कल्याण की प्रार्थना की गई है।
ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः।
वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥